हर
प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य है।
कोई
ऐसा सहीह प्रमाण नहीं है जो 100 बार सूरत फातिहा पढ़ने की वैधता को सिद्ध करती हो ताकि
बंदा अपने पालनहार से कोई चीज़ माँगे।
अतः इस पर अमल करना जायज़ नहीं है। इसलिए आप को चाहिए
कि सुन्नत का पालन करें, और अल्लाह तआला से उसके नामों और गुणों के द्वारा माँगे, और
उन्हीं के द्वारा उसकी निकटता चाहें, अल्लाह सर्वशक्तिमान का फरमान है :
﴿وَلِلَّهِ الأَسْمَاءُ
الْحُسْنَى فَادْعُوهُ بِهَا ﴾ [الأعراف
: 180]
“और अल्लाह ही के अच्छे अच्छे नाम हैं, अतः तुम उसे उन्हीं नामों
से पुकारो।” (सूरतुल आराफ : 180).
जहाँ
तक सूरत फातिहा की बात है, तो यह क़ुर्आन की सबसे महान सूरत है, अतः आप इसे जब चाहें
पढ़ें, कोई ऐसी निश्चित संख्या, या कोई निश्चित कैफियत (विधि) निर्धारित न करें जो शरीअत
में वर्णित नहीं है। अल्लाह तआला हमें और आपको हर भलाई की तौफीक़ प्रदान करे।
इस्लाम
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